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अपने लिए भी जियें ..! थोड़ा सा वक्तनिकालो वरना....पढोगे तो रो पड़ोगे ...

ज़िंदगी के 20 वर्ष.. हवा की तरह उड़ जाते हैं...! फिर शुरू होती है..... नौकरी की खोज....! ये नहीं वो, दूर नहीं पास. ऐसा करते 2-3 नौकरीयां छोड़ते पकड़ते.... अंत में एक तय होती है, और ज़िंदगी में थोड़ी स्थिरता की शुरूआत होती है.... ! ........ और हाथ में आता है... पहली तनख्वाह का चेक, वह बैंक में जमा होता है और शुरू होता है..... अकाउंट में जमा होने वाले कुछ शून्यों का अंतहीन खेल.....! ........... इस तरह 2-3 वर्ष निकल जाते हैँ....! 'वो' स्थिर होता है.... बैंक में कुछ और शून्य जमा हो जाते हैं.... इतने में अपनी उम्र के पच्चीस वर्ष हो जाते हैं...! ........... विवाह की चर्चा शुरू हो जाती है... एक खुद की या माता पिता की पसंद की लड़की से यथा समय विवाह होता है ... और ज़िंदगी की राम कहानी शुरू हो जाती है....! .......... शादी के पहले 2-3 साल नर्म, गुलाबी, रसीले और सपनीले गुज़रते हैं.....! हाथों में हाथ डालकर बातें और रंग बिरंगे सपने......! पर ये दिन जल्दी ही उड़ जाते हैं...और इसी समय शायद बैंक में कुछ शून्य कम होते हैं......! क्यों कि थोड़ी मौजमस्ती, घूमना फिरना, खरीदारी होती है.....! .........