पुरी कायनात मे सिर्फ नारी के पास ही है जो कल्पवृक्ष से कम नही है।

*बेटी...*
एक बेटी ने अपने पिता से एक प्यारा सा सवाल किया कि पापा ये आंगन मे जो पेड़ है, उसे पीछे वाले बगीचे मे लगा दे तो ? पिता असमंजस मे और बोले बेटी ये चार साल पुराना पेड़ है नई जगह, नई मिट्टी मे ढल पाना मुश्किल होगा । तब बेटी ने जलभरी आंखो से पिता से सवाल किया कि एक पौधा और भी तो है आपके आंगन का जो बाईस बरस पुराना है क्या वो नई जगह पर ढल पाएगा ? पिता बेटी की बात पर सोचते हुए कहा कि यह शक्ति पुरी कायनात मे सिर्फ नारी के पास ही है जो कल्पवृक्ष से कम नही है। खुद नए माहौल मे ढलकर औरो कि सेवा करती है । ताउम्र उनके लिए जीती है ।
बेटी से ही मां, बहन व पत्नि है ।

Comments

Popular posts from this blog

अब यह फैंसला हर माँ बाप को करना है कि अपना पेट काट काट कर, दुनिया की हर तकलीफ सह कर, अपना सबकुछ बेचकर,बच्चों के सुंदर भविष्य के सपने क्या इसी दिन के लिये देखते हैं?

एक बार समय निकालकर सोचें, शायद पुराना समय याद आ जाए, आंखें भर आएं और *आज को जी भर जीने का मकसद मिल जाए*।

एक साथ मिलकर लड़िये अन्यथा वही होगा जो उपरोक्त कुआँ खोदने वालों का हुआ.